Daily Archive: October 15, 2017

DIWALI – Festival of Lights in India must know facts

*हम दीपावली का त्यौहार क्यूँ मनाते हैं?*

इसका अधिकतर उत्तर मिलता है *राम जी के वनवास से लौटने की ख़ुशी में।*

*सच है पर अधूरा*

*अगर ऐसा ही है तो फिर हम सब दीपावली पर भगवन राम की पूजा क्यों नहीं करते? लक्ष्मी जी और गणेश भगवन की क्यों करते हैं?*

सोच में पड़ गए न आप भी।
इसका उत्तर आप तक पहुँचाने का प्रयत्न कर रहा हूँ अगर कोई त्रुटि रह जाये तो क्षमा कीजियेगा।

*1. देवी लक्ष्मी जी का प्राकट्य:*

देवी लक्ष्मी जी कार्तिक मॉस की अमावस्या के दिन समुन्दर मंथन में से अवतार लेकर प्रकट हुई थीं।

*2. भगवन विष्णु द्वारा लक्ष्मी जी को बचाना:*

भगवन विष्णु ने आज ही के दिन अपने पांचवे अवतार वामन अवतार में देवी लक्ष्मी को राजा बालि से मुक्त करवाया था।

*3. नरकासुर वध कृष्ण द्वारा:*

इस दिन भगवन कृष्ण ने राक्षसों के राजा नरकासुर का वध कर उसके चंगुल से 16000 औरतों को मुक्त करवाया था। इसी ख़ुशी में दीपावली का त्यौहार दो दिन तक मनाया गया। इसे विजय पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

*4. पांडवो की वापसी:*

महाभारत में लिखे अनुसार कार्तिक अमावस्या को पांडव अपना 12 साल का वनवास काट कर वापिस आये थे जो की उन्हें चौसर में कौरवों द्वारा हराये जाने के परिणाम स्वरूप मिला था। इस प्रकार उनके लौटने की खुशी में दीपावली मनाई गई।

*5. राम जी की विजय पर :*

रामायण के अनुसार ये चंद्रमा के कार्तिक मास की अमावस्या के नए दिन की शुरुआत थी जब भगवन राम माता सीता और लक्ष्मण जी अयोध्या वापिस लौटे थे रावण और उसकी लंका का दहन करके। अयोध्या के नागरिकों ने पूरे राज्य को इस प्रकार दीपमाला से प्रकाशित किया था जैसा आजतक कभी भी नहीं हुआ था।

*6. विक्रमादित्य का राजतिलक:*

आज ही के दिन भारत के महान राजा विक्रमदित्य का राज्याभिषेक हुआ था। इसी कारण दीपावली अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना भी है।

*7. आर्य समाज के लिए प्रमुख दिन:*

आज ही के दिन कार्तिक अमावस्या को एक महान व्यक्ति स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने हिंदुत्व का अस्तित्व बनाये रखने के लिए आर्य समाज की स्थापना की थी।

*8. जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण दिन:*

महावीर तीर्थंकंर जी ने कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही मोक्ष प्राप्त किया था।

*9. सिक्खों के लिए महत्त्व*:

तीसरे सिक्ख गुरु अमरदास जी ने लाल पत्र दिवस के रूप में मनाया था जिसमें सभी श्रद्धालु गुरु से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे और 1577 में अमृतसर में हरिमंदिर साहिब का शिलान्यास किया गया था।
1619 में सिक्ख गुरु हरगोबिन्द जी को ग्वालियर के किले में 52 राजाओ के साथ मुक्त किया गया था जिन्हें मुगल बादशाह जहांगीर ने नजरबन्द किया हुआ था। इसे सिक्ख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी जानते हैं।

*10. द पोप का दीपावली पर भाषण:*

1999 में पॉप जॉन पॉल 2 ने भारत में एक खास भाषण दिया था जिसमे चर्च को दीपावली के दीयों से सजाया गया था। पॉप के माथे पर तिलक लगाया गया था और उन्होंने दीपावली के संदर्भ में रोंगटे खड़े कर देने वाली बातें बताई।

भगवान् गणेश सभी देवो में प्रथम पूजनीय हैं इसी कारण उनकी देवी लक्ष्मी जी के साथ दीपावली पर पूजा होती है और बाकी सभी कारणों के लिए हम दीपमाला लगाकर दीपावली का त्यौहार मनाते हैं।

चोरो ने घर का ताला तोड़ जमकर की लूटपाट

नोएडा : यूके गए एक रिटायर्ड कर्नल के घर का ताला तोड़कर चोरो ने लाखों रुपये की चोरी कर चम्पत हो गए । पड़ोसियों से फोन पर जानकारी मिलने के बाद कर्नल वापस लौटे और सेक्टर-20 पुलिस से मामले की शिकायत की। चोरी की घटना सीसीटीवी कैमरों में भी दर्ज हो गई है। सेक्टर-29 में रहने वाले रिटायर्ड कर्नल हरिजन सिंह 12 सितंबर को परिवार के साथ यूके गए थे। पीछे से उनके घर का ताला तोड़कर चोरो ने चोरी को अन्जाम दिया। पीड़ित के मुताबिक लाखों रुपये की जूलरी और 90 हजार रुपये समेत अन्य जरूरी दस्तावेज चोरी हुए हैं। पुलिस सीसीटीवी कैमरे का आधार पर तलाश कर रही है।

पटाखों की तस्करी बनी पुलिस के लिए चुनौती

नॉएडा – सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद लोगों में दिवाली पर पटाखे फोड़ने का उत्साह कम नहीं हुआ है। शहर में पटाखे नहीं मिलने पर लोग दिल्ली एनसीआर के लोग आसपास के शहरों से पटाखे खरीद कर ला रहे हैं। पटाखों की तस्करी को रोकना पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। वहीं, पुरे जनपद में छोटे बाजारों में शाम के बाद चोरी-छिपे पटाखे बेचे जा रहे हैं। दुकानदार पटाखों के लिए 20 से 30 फीसदी अधिक कीमत वसूल रहे हैं। अगर आसपास से पीसीआर वैन गुजरती है तो दुकानदार मिनटों में पटाखे समेट लेते हैं। जानकारी के अनुसार, बैन लगने के बाद लोग दुगने दामों पर पटाखे खरीदकर ला रहे है कुछ लोगो ने बताया कि पिछली बार इतने ही पटाखे ही करीब 2 से 4 हजार रुपये में मिल जाते थे , लेकिन इस बार दुकानदार ने जीएसटी और प्रतिबंध का नाम लेकर उससे करीब दुगने दामों पर बेच रहे है। हालांकि, वह जानते थे कि यह पैसा जीएसटी में नहीं बल्कि मुनाफाखोरी में जाएगा, लेकिन कोई और विकल्प भी नजर नहीं आ रहा था।

नोएडा डाइबेटिक फोरम ने किया स्वास्थय जां च शिविर का आयोजन

नोएडा। नोएडा डाइबेटिक फोरम द्वारा निःशुल्क स्वास्थ जांच शिविर का आयोजन सेक्टर 33 स्थित आर्य गुरूकुल में किया गया। संस्था के पदाधिकारी पंकज जिंदल ने बताया कि नोएडा डाइबेटिक फोरम हर माह स्वास्थय जांच शिविर का आयेजन करती है हमारे ण्इस केम्प का मुख्य उददेश्य सर्दियों की शुरूआत के साथ दिल्ली एनसीआर में प्रदुषण के बढते स्तर को देखते हुए सांस की बढती बिमारियों पर जागरूकता पैदा करना हैं।
डाॅ0 एन0 के0 कौशिक ने बताया पहले सांस की बीमारियां 55 साल से अधिक उम्र में पाई जाती थीं, लेकिन आज बढ़ते वायू प्रदूषण के चलते 25 साल के युवा भी इन बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति भारत के लिए चिंताजनक है। इसलिए ज़रूरी है कि सभी आयुवर्गों के लोग स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं और अपने स्वास्थ्य के लिए उचित सावधानियां बरतें।
इस स्वास्थय जांच शिविर में डाॅ0 एन0 के0 कौशिक के साथ कार्डियोलाजिस्ट डाॅ0 संजय, व फिजिशियन डाॅ0 शिखा, डाॅ0 विनोद, दन्त चिकित्सक डाॅ0 पंकज हडडी रोग विशेषज्ञ डाॅ0 कमल, ने लगभग 250 मरीजों का परीक्षण कियास इस मौके पर ईसीजी, बीपी, ब्लड शुगर आदि कि निःशुल्क जांच की गयी।

RISHIPAL VISHAL DANGAL IN NOIDA

*दंगल का आमंत्रण*
आप ऋषि पाल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित *23वेअखिल भारतीय ऋषिपाल विशाल दंगल* में सादर आमंत्रित हैं । हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है, कि आप निम्न कार्यक्रम अनुसार अवश्य पधार कर इस दंगल की ऊंचाइयों को बढ़ाएंगे ।

*ऋषिपाल मैमोरियल ट्रस्ट*
नौएडा में एकमात्र ऐसा ट्रस्ट है जो पिछले 22 साल से खेल ही नहीं अन्य क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनाए हुए है । भाई ऋषिपालआर्य का दुखद निधन एक सड़क दुर्घटना में 16 अक्टूबर 1994 तब हो गया था जब वो मोरना गांव ( सेक्टर-35 ) से एक किसान पंचायत को संबोधित कर वापिस लौट रहे थे । तब से लेकर अब तक यह ट्रस्ट सडक सुरक्षा सप्ताह, ब्लड डोनेशन व भंडारा आदि सामाजिक गतिविधि चलाता आ रहा है । भाई ऋषि पाल जी के नाम पर जहां उनका दुखद सड़क हादसा हुआ उस चौराहे का नाम ऋषिपाल चौक 1994 मे़ रखा गया ( जो अब सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन की बराबर में अंडरपास वाला चौराहा है ) जहां पर प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को प्रातः 7:00 बजे उनके प्रशंसक व मित्रगण् उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। उनके नाम से सेक्टर-15 में सड़क तथा क्रीडा स्थल का नामकरण किया गया । भाई ऋषिपाल हम सब के दिलों में आज भी जीवित है। उनके विचार हम सबको प्रेरणा देते रहे हैं ।

*दिनांक तथा समय*
*16-10- 2017, ( सोमवार),*
दोपहर- 12 बजे से

*स्थान*
ऋषिपाल क्रीडा स्थल, नयाबांस,
सेक्टर-15, नौएडा ।

धन्यवाद ।

*ऋषिपाल मेमोरियल ट्रस्ट ( रजि.)*
नयाबांस, सेक्टर-15,
नोएडा