Daily Archive: June 6, 2017

Noida’s Shaheed and Shaheed Smarak

 Ye mere watan ke logo…….Jo shaheed huin hai unki ….Jara yaad karo qurbani….

 Noida is home to many brave soldiers who have sacrificed their lives for the nation and also those who have returned victorious to narrate tales of courage and heroism. With unrelenting courage and fierce determination, these bold soldiers guard the country from the enemy’s evil designs risking their life at every step. A soldier’s death is a soldier’s death, wherever the battlefront.

The idea of constructing a Shaheed Memorial first came up for consideration in the General Body Meeting of Arun Vihar Residents Association in 1997. The suggestion was well received. It was decided to pursue it and explore the feasibility of generating the resources for its construction. The Memorial would be in honour of those who made the supreme sacrifice and whose families were residing in Noida.This has been a landmarks to remind the citizens of the supreme sacrifices made by the people to uphold the integrity of the nation and which, in turn, would draw the attention of citizens in the task of national building.

The Shaheed Smarak at Noida is a famous land mark that no visitor can miss. It is situated on Shaheed Smarak Marg sector 29 where vintage AD guns are displayed at the entry point.

 

 

The design of the Memorial is in the form of a hexagonal structure of one “Parikarma” and a cenotaph, 25 feet high, on another pedestal of the same configuration as the “Parikarma”. The triangular tower coloured cherry – red symbolizes the arrow of “Eklavya”. The needle – point on the top of the cenotaph aims skywards and indicates that the martyrs who die in the line of duty, go directly to heaven blessed by countless countrymen.

It is maintained by the Shaheed Smarak Sanstha. Funds are provided through voluntary donations and by the Noida Authority.

The landscaping is a feast to the eyes with beautiful Doob grass and a six-fit –wide pathway.

The memorial which has been built by the residents of NOIDA led by retired defence services personnel drawn from all the three Services, is an eloquent tribute and homage to the martyrs.

For the families of those whose names are inscribed on the memorial, it was the fulfilment of a dream cherished in their hearts for a long time. “Finally all the martyrs have been given the recognition they deserve,” said the people present at the inaugural function.

In all, there are nine martyrs listed out on the memorial.

1. Major Anurag Nauriyal…… IC-30005 was one such martyr who made the supreme sacrifice on 23rd October 1990 for the nation during operation ‘rakshak’ in Punjab, where he fell to terrorist bullets while fighting against terrorists .He was awarded the Kirti Chakra posthumously for his act of bravery. His widow Uma Nauriyal has been alloted Indian Oil Corporation retail outlet located, in Sector 52, Noida..

2. Capt DS Ahlawat was awarded Mahavir Chakra posthumously for displaying bravery in the 1971 war. Capt DS Ahlawat of 10 Dogra Regiment who displayed bravery and valiance of an exceptional order during the battle of Dera Baba Nanak in 1971

3. 2/Lt S Kumar attained glory in 1971 in the prime of his life. He hailed from 17 Armoured Regiment.

4. Sqn Ldr IH Naqvi is the only name from IAF. He attained martyrdom in 1984.

5. Lt Col AK Chabra belonging to 10 Para Commando attained martyrdom in 1989.

6. Capt S Sharma of Artillery attained martyrdom in 1995.

7. Capt Shashi Kant Sharma of J & K LI made supreme sacrifice in 1998.

8. Capt Vijyant Thapar of 2 Rajputana Rifles attained martyrdom in 1999

Capt. Vijayant Thapar, VrC, Gallant Kargil Martyr

9. Maj Sanjay Sood, belonging to 21 Rashtriya Rifles, sacrificed his life for the country in the year 2000.

Martyers of Noida

Nation’s second highest wartime gallantry award MAHA VIR CHAKRA was awarded to Captain Anuj Nair on 15th August 1999…Indian government has allotted a petrol pump ‘ Kargil Heights Filling station  ‘ at  Vashundhara Enclave, near Chilla sports complex .

Vijay Diwas 2010 to pay homage…

Lt Gen G L Bakshi…Chairman of Noida Shaheed Smarak Santha..

Videos of 2009..

Kargil Diwas…

Useful link

Region Wise Pin Code Details of Noida

Noida H.O 201301 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Bisrakh S.O 201301 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Maicha S.O 201301 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Sec-12 Noida S.O 201301 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Sec-16 Noida S.O 201301 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Sec-27 Noida S.O 201301 GHAZIABAD
Sec-30 Noida S.O 201301 GAUTAM BUDDHA NAGAR

 

 

Sec-37 Noida S.O 201303 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Sec-41 Noida S.O 201303 GHAZIABAD
Sec-45 Noida S.O 201303 GAUTAM BUDDHA NAGAR

 

Maharishi Nagar S.O 201304 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Baraula B.O 201304 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Gejha B.O 201304 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Parthala Khanjarpur B.O 201304 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Sarfabad B.O 201304 GAUTAM BUDDHA NAGAR

Nepz Post Office S.O 201305 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Chhaprauli Bengar B.O 201305 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Nagla Charandas B.O 201305 GAUTAM BUDDHA NAGAR

 

Sec-34 Noida S.O 201307 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Sec-55 Noida S.O 201307 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Chhajarsi B.O 201307 GAUTAM BUDDHA NAGAR
Khora Gaon B.O 201307 GAUTAM BUDDHA NAGAR

Noida Post-Office Details

Name HEAD POST OFFICE
Address SEC-19, Noida
Manager Name Shri Daya Ram Dube
Contact 2546189

Name HEAD POST OFFICE
Address SEC-16, Noida
Manager Name Shri Rajveer Singh
Contact 2516008
Name POST OFFICE
Address Post Office SEC-34, N.T.P.C.
Manager Name Shri Parmanand Sharma
Contact 2410909

Name POST OFFICE
Address A-37, Sec-12
Manager Name Sri Naresh Sharma
Contact NA
Name Post Office
Address SEC-37, Noida
Manager Name Smt Raj bala
Contact 2430213
Name Post Office Baruala
Address baruala,Noida
Manager Name Neeraj
Contact N/A
Name POST OFFICE
Address Gram-Chijarsi
Manager Name Smt. Gaura Devi
Contact 9312133650

Name POST OFFICE
Address B-Block Market, SEC-56
Manager Name Shri Atma Prasad
Contact 9899884996

 

Name POST OFFICE
Address NSEZ
Manager Name Sri Bhudev Sharma
Contact 2668166

निठारी का सच, परत-दर-परत…. सुनील मौर्य

निठारी। अब भी आपके दिलोदिमाग में अच्छे से याद होगा। आगे भी याद रहेगा। क्योंकि अभी इसमें बहुत कुछ होना बाकी है। फैसला आना बाकी है। कई फैसले आ भी चुके हैं। लेकिन अंतिम फैसले का इंतजार हम, आपको ही नहीं देश के बाहर मौजूद लोगों को भी है। आखिर उन दो आरोपियों को क्या सजा मिले। मैं मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली के लिए आरोपी शब्द का प्रयोग करना ही उचित समझ रहा हूं। यहां पर हैवान, नरपिशाच…. जैसे शब्दों का प्रयोग करना नागवार समझता हूं। माना कि दोनों पर रूह को कंपा देने वाले आरोप हैं। लेकिन वो दोनों भी हम जैसे इंसानों की बस्ती के बीच से ही निकलकर आए हैं। हमारे समाज से तालुक्कात रखते हैं। लिहाजा, कहीं न कहीं, उनके अंदर भी पहले इंसानियत रही होगी। जो बाद में हैवानियत (जैसा कि अब तक इनके लिए प्रयोग किया गया) में बदल गई। खैर, यहां हम आपको यह बताना चाहते हैं कि निठारी को मैने वर्ष 2005 से देखा है। इस केस के परत-दर-परत के बारे में मुझे पता है। जो शायद आम लोगों को नहीं पता है।
अक्सर मैं अपने घर या अन्य किसी जगह जाता हूं तो नोएडा में रिपोर्टिंग करने की जानकारी देते ही लोग बरबस ही पूछ लेते हैं कि आखिर क्या था निठारी कांड। आजकल आरुषि केस के बारे में भी पूछते हैं। आरुषि केस के बारे में भी मैं काफी अनछुए पहलू बताऊंगा लेकिन पहले निठारी।
उन लोगों को कुछ बताने से पहले मैं पूछता हूं कि आपकी नजर में क्या है निठारी कांड। नौकर और मालिक, आखिर आपकी नजरों में कौन है ज्यादा दोषी। अब यही सवाल मैं आपसे भी पूछता हूं। कौन है दोषी? शायद यही जवाब मिलेगा, दोनों। सच भी है। लेकिन पूरी तरह से नहीं। अब आप चौंक गए होंगे। आखिर यह क्या कह रहा है। लेकिन सच यही है। यहां मैं किसी के पक्ष और खिलाफ की बात नहीं कर रहा हूं। बल्कि हकीकत बयां कर रहा हूं। रिपोर्टिंग के दौरान और अब भी जब कभी मैं खबर लिखता हूं तो दोनों के खिलाफ जहर उगलता हूं। क्योंकि अगर ऐसा नहीं करते हैं तो पाठक कहेगा कि पत्रकार भी सरदार मोनिंदर से मिल गया। लेकिन यहां एक लाइन में आपको बता दूं कि वाकई में जब कभी निठारी के डी-5 कोठी में बच्चों का कत्ल हुआ उस दौरान मोनिंदर सिंह विदेश में था। सीबीआई की जांच में यह सच्चाई सामने आई है।
मोनिंदर सिंह की कॉल डिटेल मेरे पास है। जब कभी निठारी में बच्चों के कत्ल हुए उसका मोबाइल फोन लगातार कई दिनों तक बंद रहा है। इस पर मैने अपनी रिपोर्टिंग के दौरान एक्सक्लूसिव खबर की थी। उसमें लिखा था कि मोनिंदर सिंह पंधेर खास पैर्टन पर बच्चों का कत्ल करता था। वह घटना से एक या दो दिन पहले ही अपना मोबाइल फोन बंद कर लेता था ताकि किसी को उसके बारे में जानकारी नहीं मिले और वह शातिराना तरीके से घटना को अंजाम दे। लेकिन वाकई में उस दौरान मैं गलत था। सच्चाई, सीबीआई ले आई है। और वही हकीकत है। लेकिन हम मीडिया वाले इसे गलत करार देते हैं। क्योंकि इसे आसानी से पचाया नहीं जा सकता है। और आप पचा भी नहीं पाएंगे।

कहां है निठारी….

निठारी। राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-31 के पास निठारी एक छोटा सा गांव है। जो अब से 10 साल पहले जहरीली शराब कांड को लेकर चर्चा में आया था। एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। हालांकि मृतक के परिजनों के जेहन में अब भी वह याद है। लेकिन अन्य लोग यहां तक की मीडिया भी उसे भूल चुकी है। खैर, अब निठारी शब्द जेहन में आते ही खुद-ब-खुद मासूम बच्चों की चीख-पुकार उमड़ आती है। आंखों में एक खौफनाक दृश्य उभरता है। जिसमें एक कोठी के मालिक व नौकर मासूम बच्चों को किसी न किसी बहाने अपने पास बुला लेते हैं। इसके बाद उनके साथ हैवानियत की हदें पार कर देते हैं। बच्चों की हत्या करने के बाद लाश के टुकड़े-टुकड़े कर नाले में बहा देते हैं।

खूनी कोठी

खूनी कोठी नंबर डी-5। भला इसे कौन भूल सकता है। भुलाया भी नहीं जा सकता है। यहां एक या दो नहीं बल्कि 17 बच्चों की दर्दनाक मौत हुई। उनके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद गला घोंटकर हत्या कर दी गई। शव के कई टुकड़े किए गए। कुछ हिस्से को कोठी के पीछे तो कुछ को सामने के नाले में बहा दिया गया। यह सिलसिला डेढ़ साल से ज्यादा समय तक चला। लेकिन किसी की नजर इस कोठी पर नहीं पड़ी। इतना जरूर हुआ कि कोठी के पास स्थित पानी की एक टंकी के आसपास से बच्चों को गायब होने का शक जरूर हुआ। गांव वालों ने यहां तक मान लिया कि पानी टंकी के पास कोई भूत रहता है जो बच्चों को निगल जाता है। या फिर पानी टंकी के पास से ही कोई बच्चों को गायब करने वाला गिरोह सक्रिय है।
इस कोठी में मोनिंदर सिंह पंधेर रहता था। यह शख्स आईएएस की तैयारी भी कर चुका है। रिटेन एग्जाम निकाल इंटरव्यू देने की बात अब तक सामने आ पाई है। लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। इस शख्स की करोड़ों की प्रॉपर्टी है। वह जेसीबी मशीनों की सप्लाई करने वाली कंपनी में बतौर सीनियर अधिकारी था। इसकी गिनती शहर के रईसजादों में होती रही है। इसने वर्ष 2005 में सेक्टर-31 डी-5 नंबर की कोठी खरीद ली थी। वजह थी, घर परिवार चंडीगढ़ में होने की वजह से नोएडा में रहने का ठिकाना। क्योंकि नोएडा में ही उसकी कंपनी थी।
अब नोएडा में परिवार नहीं होने की वजह से मोनिंदर सिंह पंधेर को एक नौकर की तलाश थी। इसलिए चंडीगढ़ में नौकरी कर चुके सुरेंद्र कोली को नोएडा बुला लिया। दरअसल, सुरेंद्र खाना बनाने में एक्सपर्ट था। खासतौर पर नॉनवेज बनाने में। इसलिए मोनिंदर सिंह ने उसे नोएडा अपने साथ रख लिया। वह कोठी में ही छत पर बने एक कमरे में रहने लगा। लेकिन महीने में अधिकतर दिन मोनिंदर सिंह पंधेर कहीं न कहीं टूर पर ही रहता था। लिहाजा, कोठी के मालिक की तरह सुरेंद्र ही रहता था।

एक कॉलगर्ल की नजर में पंधेर

मोनिंदर सिंह पंधेर कई कॉलगल्र्स के संपर्क में था। अब आप जरूर सोच रहे होंगे कि मुझे कैसे पता। तो मैं बता दूं कि मेरे पास पंधेर के मोबाइल फोन नंबर 9810098644 की 1 जुलाई 2006 से 30 दिसंबर 2006 तक की कॉल डिटेल है। इसका मैंने कई दिनों तक लगातार अध्ययन किया। उसमें से मैने कई नंबरों को शार्ट लिस्टेड किया। उन नंबरों पर कॉल किया। इनमें से कई नंबर कॉलगर्ल के निकलें। लेकिन किसी ने अपनी असलियत बताना मुनासिब नहीं समझा। अचानक एक खास नंबर लगातार आउटगोइंग कॉल पर नजर टिकी। मैने कॉल किया। जवाब मिला ‘हैलो, हू आर यूÓ। मैने कहा ‘ एम आकाश, फ्राम क्राइम इंवेस्टिगेशन टीम। आपका नंबर पंधेर की कॉल डिटेल में है। कई बार आपकी बातचीत हुई है। इसकी वजह। कैसे जानती हैं आप उसे।Ó इस तरह सवालों का लंबा-चौड़ा जाल फेंक डाला। ताकी सामने वाले को मेरी असलियत का पता ही न चले। अक्सर खबरों की खबर निकालने के लिए मैं ऐसी हरकत कर लेता हूं। जब कोई आसानी से मीडिया वाले को जवाब नहीं देता था। ऐसा करना मजबूरी भी हो जाती थी।
जवाब मिला ‘ हां, जानती हूं। मैने पूछा आपका नाम। जवाब दिया कि आप लोग कई बार पूछ चुके हैं। फिर क्यों? आखिर आप कौन हैं। मैं सब कुछ बताऊंगी लेकिन पहले आप सचाई बताएं। मुझे लगा ये औरों से अलग है। अंदाजा सही भी निकला। उसने अपना नाम क्रिस्टी बताया। नार्थ इंडिया की रहने वाली हूं। और आप, अभी तक नहीं बताया आपने।
उसकी ईमानदारी जानकर मैने भी अपनी असलियत उजागर कर दी। बता दिया मीडिया वाला हूं। वह थोड़ा हिचकिचाई। लेकिन थोड़ी देर बाद खुल गई। टूटी फूटी हिंदी बोलती थी। लेकिन सच बोलती थी। क्राइम कवर करता रहा हूं, तो इतना अंदाजा लगा लिया। मैने पूछा कि किस तरह की शख्सियत है पंधेर। सबसे पहले जवाब मिला कि आप लोग ‘उनकेÓ बारे में गलत लिखते हैं। नर पिशाच, हैवान…. ऐसे नहीं हैं वो। दिल के बहुत अच्छे हैं। खुशमिजाज इंसान हैं। सभी तरह से खुश रखते हैं। मुझे कई बार सूरजकुंड मेले में घुमाने भी ले जा चुके हैं। उनके साथ टूर पर देहरादून भी जा चुके हैं। मैने उनके साथ काफी हसीन पल गुजारे हैं। हर पल मुझे याद है। जब कभी वह टेंशन में होते थे मुझे याद करते थे। हम भी इसका इंतजार रहता था। कभी ऐसा नहीं लगा कि उनके दिल में प्यार के साथ हैवान भी छिपा है। ऐसा है भी नहीं। इतना करीब से जो देखा है। बच्चों से वह बहुत प्यार करते थे। इसका अहसास भी मुझे है। बच्चों के साथ कभी भी वह इस तरह हैवान नहीं बन सकते। इतना दावे के साथ कह सकती हूं। क्योंकि इतने रुपये हैं उनके पास जब चाहे उसे घर पर बुला सकते थे। इसलिए गरीब बच्चों के साथ हैवान बनना, कभी नहीं हो सकता। सपने में भी नहीं।
मैने पूछा कि कोठी में कितनी बार गई और क्या महसूस किया? जवाब मिला, कई बार गई। अक्सर जाती रहती थी। जब कभी वह बुलाते थे। कोठी में थोड़ा अजीब लगता था। लेकिन उनके होने पर महसूस नहीं होता था। लेकिन नौकर बहुत अजीबोगरीब नजरों से देखता था। उससे डर जरूर लगता था। उसकी हरकतें भी अजीब थी। इसलिए वह शराब और खाने का सामान पहुंचाकर चला जाता था। फिर वह पंधेर पर आ जाती है। कहती है लेकिन वह दिल के बड़े अच्छे थे। अपनी इच्छाओं को जताते थे। उसने यहां तक बताया था कि मैं कोर्ट में भी जाऊंगी और पूरी बात बताऊंगी। सीबीआई के कहने पर वह गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट में गई थी। मशहूर फिल्म देवदास का डायलॉग है कि ‘तवायफ के पास भी दिल होता हैÓ। इससे पता चला कि माधुरी दीक्षित की रील लाइफ की तरह क्रिस्टी की रीयल लाइफ में पंधेर के रूप में एक देवदास था। जो शराब पीकर तो नहीं, जेल में अब आखिर की जिंदगी गुजार रहा है।

29 दिसंबर 2006 का वो दिन……

सुबह करीब 9 बज रहे थे। अच्छी खासी ठंड थी। इत्तफाक से उस दिन मैं जल्दी ही घर से बाइक लेकर नोएडा आ गया। शायद कोई प्रेस कॉंफ्रेंस होने वाली थी। टेलिफोन एक्सचेंज चौराहे पर पहुंचा था तभी मोबाइल फोन की घंटी बजी। जवाब मिला, निठारी से सतीश चंद्र मिश्रा बोल रहा हूं। पानी टंकी के पास कंकाल मिल रहे हैं। इतना सुनते ही मैं समझ गया कि गायब हो रहे बच्चों से जुड़ा मामला है। बाइक की रफ्तार अपने आप तेज हो गई। वहां से महज 5 से 10 मिनट में निठारी पहुंच गया। देखा लोगों की भारी भीड़ थी। पानी टंकी के पास यानी डी-5 कोठी के पीछे खुदाई चल रही थी। एक कंकाल, फिर दूसरा, तीसरा…. फिर…लगातार। कुछ देर में एक न्यूज चैनल वाले पहुंचे। उन्होंने खबर ब्रेक की। इसके बाद हलचल मच गया। चैनलों पर खबर देख निठारी से हजारों की संख्या में लोग इक्ट्ठा हो गए। उस समय तक इक्का-दुक्का पुलिसकर्मी मौजूद थे। लेकिन भीड़ देख नोएडा के अधिकतर थानों की पुलिस फोर्स जुट गई।
लोगों की चीख पुकार उमड़ पड़ी। निठारी ही नहीं, नोएडा के आसपास के जिलों से लापता हुए बच्चों के माता-पिता भी निठारी पहुंचे। चैनल के मीडियाकर्मियों में उत्सुकता बढ़ गई थी। जहां-तहां कैमरे तन गए। हर कोई एक्सक्लूसिव करना चाहता था। कोई कोठी के भीतर घुस जाता तो कोई छत पर। हर जगह मीडियाकर्मियों की भरमार। खुलासा हुआ कि निठारी से पिछले कई सालों से गायब हो रहे बच्चों को इस कोठी में मार दिया गया। मीडिया के सवाल लापता हुए बच्चों के मां-बाप के सीने में जहरीले तीर की तरह चुभते थे। उनका गुस्सा और भड़कता था। फिर भी सवाल की रफ्तार कम नहीं होती थी। सवाल पर सवाल। आखिर कैसे हुआ आपका बच्चा गायब। क्या लगता है आपको। कैसे मार दिया गया। पुलिस ने आपकी सुनी की नहीं। क्यों अनसुना कर दिया। आपके बच्चे का भी कंकाल मिला? यह सुनकर बच्चों के मां-बाप का गुस्सा भड़क जाता था। पुलिस को गालियां बकते थे। ज्यादा गुस्सा आया तो किसी पुलिस वालों की वर्दी पकड़ ली। सभी कैमरों की नजर वहीं टिक जाती थी।
जैसे-जैसे समय बीतता गया। पुलिस की वर्दी पर थू-थू होने लगी। पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगने लगे। पुलिसवालों को मार डालों। हाथों में चूडिय़ां पहना दो। कोठी में आग लगा दो……वगैरा वगैरा। पुलिस के हाथों में डंडा था, लेकिन वह खुद पीट जाते थे। सामने से गालियां पड़ती थी, पर उसे अनसुना करने में ही भलाई थी। करते भी क्या, कैमरे की नजर जो हर जगह थी। दोपहर हो गया। प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से लगभग अधिकतर रिपोर्टरों को निठारी बुला लिया गया। सबसे कहा गया, कुछ स्पेशल करने के लिए। किया भी सभी ने। यही हाल कैमरे वालों का। ज्यादा से ज्यादा मार्मिक और गुस्से वाला फोटो खींचों। आखिरकार, शाम आ गई। हम अखबार वालों को आखिरकार लौटना पड़ा ऑफिस।
कुछ भी नहीं समझ में आ रहा था कि आखिर खबर की शुरुआत कहां से की जाए। मार्मिक या फिर पुलिसकर्मियों की लापरवाही से। इसी में डेस्क पर कार्य करने वाले लोगों के सवालों का जवाब भी देना पड़ता। कैसे हो गया, क्यों हुआ, क्या किसी को भनक नहीं लगी, पुलिस सोती रही, पड़ोसियों को पक्का पता होगा, कितने बच्चे मारे गए, ………। अब एक सवाल का जवाब दो। तो उसमें भी कई सवाल। अब खबर लिखें या जवाब दें। खैर, खबर लिखी गई। एक नहीं, दर्जनों एंगल से। लेकिन हमेशा उत्सुकता होती कि आखिर कोठी के पास क्या हो रहा है। सभी साथी रिपोर्टरों ने भी खबर लिखी। सभी बच्चों के फाइल फोटो जुटाए गए। यह पता लगाया कि आखिर कितने लोग कोठी के शिकार हुए। फाइनल हुआ एक दर्जन से ज्यादा बच्चे। लेकिन पूरी तरह से पुष्टि नहीं हुई। एक ही पुष्टि हुई। वह थी 21 वर्षीय दीपिका उर्फ पायल। दरअसल, इसके लापता होने के बाद पायल का मोबाइल फोन सुरेंद्र कोली ने यूज किया था। पुलिस को शक था कि डी-5 में रहने वाले नौकर सुरेंद्र कोली ने ही उसे गायब करा दिया है। काफी कड़ाई से पूछताछ के बाद उसने केवल पायल की हत्या की बात कबूल की थी। इसलिए पुलिस को और बच्चों के गायब होने और बाद में कोठी में मार डालने की भनक नहीं लगी थी। लेकिन पायल का शव बरामद करने के लिए कोठी के पीछे पहुंची तो वहां कई कंकाल देखकर सभी लोग दंग रह गए। इसके बाद परत-दर-परत खुलती गई। धीरे-धीरे कर नौकर सुरेंद्र कोली ने बच्चों को किसी न किसी बहाने कोठी में बुलाकर उनकी हत्या, रेप करना और फिर शव को ठिकाने लगाने की बात कबूल कर ली। देर रात तक आधे दर्जन बच्चों को मारे जाने की पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की।————————————
फुटपाथ पर बैठकर मना नया सालहर साल की तरह वर्ष 2007 मनाने की भी सभी की तैयारी थी। मेरे कुछ साथी लोगों ने मनाली तो कोई हरिद्वार तो कहीं….और जाने के लिए टूर प्लान भी बना लिया था। तैयारी भी हो गई थी। ऑफिस से छुट्टी भी मिल गई थी। लेकिन निठारी में दो दिनों के माहौल और अंतर्राष्ट्रीय खबर बनते देख सभी की छुट्टी कैंसल कर दी गई। तमाम मीडिया कर्मी सुबह 7 बजे से ही कोठी के आसपास जुटने लगे थे। हमलोगों और तमाम पुलिस फोर्स को देख वहां चाय की कई दुकानें भी टेंपररी खुल गई थी। दुकान भी अच्छी चलती थी। क्योंकि एक तो सुबह बिना कुछ खाए-पीए निठारी चले आते थे। यहां आने के बाद कब समय निकल जाता था, पता ही नहीं चलता था। इसलिए चाय के साथ बिस्किट भी मिल जाए, तो थोड़ी पेट पूजा हो जाती थी। आखिरकार, पहली जनवरी को भी हमलोग ऐसे ही मिले। हमलोग एक दूसरे को बधाई भी देते थे। लेकिन चेहरे से नहीं दिखाते थे। क्योंकि पास में रोने-धोने की आवाजें आती थी। कोई अपने बच्चे की फोटो लिए हमलोग के पास पहुंच आता था। कहता था कि मेरे भी बच्चों को ढुढ़वा दो। हमलोग भी उसकी पीड़ा में शामिल हो जाते थे। तुरंत फोटो कराते थे। नाम और बच्चे की उम्र पूछते थे।
अगर दो या तीन लोग उससे पूछते थे तभी पीछे से दर्जनों मीडियाकर्मियों की भीड़ जुट जाती थी। इसलिए कि कहीं, इन लोगों के पास कोई एक्सट्रा जानकारी न हो जाए। इस तरह पीडि़तों की हर खबर हर जगह, चाहे वो प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक, सभी में आ जाती थी। अब ये बात अलग है कि उनके बच्चे के बारे में कुछ पता चला या नहीं, इस पर कोई गंभीरता से नहीं सोचता था। सोचता भी कैसे, हर रोज एक नई कहानी सामने आती थी। हर रोज, नए चेहरे दिखते थे। उनसे ही फुर्सत नहीं मिलती थी। तो पहले के मामलों का क्या हुआ, कहां से पता करते। खैर, इसी तरह चाय की चुस्की लेते हुए नए साल का पहला दिन गुजर गया। अहसास ही नहीं हुआ कि नया साल भी था। जैसे इस साल हुआ। या फिर पिछले साल हुआ।

अब से करीब पांच साल पहले 20 जून 2005 की दोपहर की बात है। आठ साल की बच्ची ज्योति खेलने के लिए निठारी के पानी टंकी के पास गई। लेकिन वह दोबारा घर नहीं लौटी। इससे पहले भी दो मासूम बच्चियां पानी टंकी के पास से ही गायब हुईं थी। ज्योति के पिता झब्बू व अन्य परिजनों ने उसकी बहुत तलाश की। लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके कुछ दिनों बाद ही छह साल का हर्ष भी पानी टंकी के पास से गायब हो गया। ज्योति की तरह हर्ष का भी कुछ पता नहीं चला। इस तरह लगातार डेढ़ साल तक यह सिलसिला चलता रहा। एक के बाद बच्चे गायब होते रहे। लोग अपने बच्चों को पानी टंकी के पास भेजने से डरने लगे क्योंकि यहीं से बच्चे गायब हो जाते थे। पुलिस भी पहले इसे महज इत्तेफाक समझती रही। लेकिन जब एक दर्जन से ज्यादा बच्चे गायब हुए तो पुलिस को इसके पीछे कुछ गहरी साजिश नजर आई। पुलिस टीम को इसके पीछे बच्चों को गायब कर उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेलने वाले बेडिय़ा गिरोह पर शक हुआ। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने एनसीआर के अलावा, मुंबई, आगरा, बिहार के कई जिलों समेत देश भर में जगह-जगह चक्कर लगाए। लेकिन कोई खास सुराग नहीं मिला। मिलता भी कैसे। पुलिस देश भर में चक्कर लगाती रही जबकि सुराग निठारी में मौजूद था।

लापता बच्चों का किसी भी तरह से नहीं मिल रहा था सुराग

निठारी केस की जांच में नोएडा पुलिस के सभी सीनियर अधिकारी से लेकर कई सब इंस्पेक्टर जुटे हुए थे। अधिकारी गाइड करते थे। लेकिन फील्ड वर्क सब इंस्पेक्टर करते थे। जगह-जगह घूमना और पूछताछ करने की जिम्मेदारी दो स्टार लगाने वालों के कंधों पर थी। इस केस की जांच में पुलिस ने बहुत मेहनत की। लेकिन लापरवाही भी पग-पग पर हुई। छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना, नोएडा पुलिस की फितरत थी। रही है और लगता है आगे भी रहेगी। जबकि क्राइम के हर केस में सभी छोटी चीज काफी महत्वपूर्ण होती है। खैर, लापरवाही तो बहुत हुई। उसकी चर्चा बाद में। पहले, जांच अधिकारियों की बात।
इस केस की सबसे ज्यादा देर तक जांच की सब इंस्पेक्टर विनोद पांडे ने। निठारी से लगातार गायब हो रहे बच्चों की जांच करने वाली टीम कई बार बदली थी। लेकिन कुछ कॉमन रहा था तो वह है टीम में एसआई विनोद पांडे का होना। विनोद पांडे बताते हैं कि निठारी से गायब हुए बच्चों में ज्यादातर लड़कियां थी। इसलिए शक हुआ कि नोएडा में ऐसा गिरोह सक्रिय है जो बच्चियों को बहला फुसला कर उन्हें बेच दे रहा है या फिर वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल रहा है। क्योंकि इस तरह के देश-विदेश में कई मामले सामने आ चुके थे। लिहाजा, जांच की दिशा भी इसी के इर्द-गिर्द थी। यही वजह है कि मामला तूल पकडऩे पर गायब बच्चों के परिजनों को लेकर आगरा, बिहार, हरियाणा, राजस्थान से लेकर मुंबई तक के चक्कर लगाए गए। लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों को जवाब नहीं दे पाते थे। आखिर क्या हुआ बच्चों के साथ। जमीन खा गई या आसमां निगल गया। इसके बावजूद जांच जारी रही।

पायल के गायब होने से आया नया मोड़

21 साल की लड़की पायल के 7 मई 2006 को निठारी से गायब होने की सूचना से पुलिस चौक गई थी। क्योंकि इससे पहले निठारी से गायब हुई सभी बच्चियां थीं। इस तरह जांच दो दिशाओं में बंट गई। एक बच्चों के लापता और दूसरा पायल की गुमशुदगी की तरफ। चूंकि मामला निठारी से जुड़ा था, इसलिए लापता बच्चों की जांच में जुटी पुलिस टीम को इस केस की फाइल भी पकड़ा दी गई। इस बारे में पायल के पिता नंदलाल लगातार पुलिस पर खोजबीन का दबाव बना रहे थे। पुलिस को जानकारी मिली कि पायल के पास एक मोबाइल फोन था। वह अब स्विच ऑफ आता है। इसलिए पुलिस ने उस नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई। कॉल डिटेल में मुंबई से लेकर तमाम जगहों के नंबर पर थे। पुलिस ने उन नंबरों की जांच की। लेकिन हर जगह से पुलिस खाली हाथ लौट आई। एक खास नंबर पर कई इनकमिंग और आउट गोइंग कॉल देखकर पुलिस ने उस पर बातचीत की। वह नंबर मोनिंदर सिंह का पंधेर का निकला।
पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने यह बताकर पल्ला झाड़ लिया कि नौकरी के लिए वह आती रहती थी। चूंकि पंधेर की गिनती बड़े रईसजादों में होती थी। इसलिए पुलिस उससे कड़ाई से पूछताछ नहीं कर पाती थी। लेकिन पायल का जब कहीं सुराग नहीं मिला तब जांच टीम ने पंधेर का देसी अंदाज में नार्को टेस्ट करने के लिए पुलिस अधिकारियों से इजाजत मांगी। जांच में जुटे तत्कालीन सीओ दिनेश यादव ने इसकी इजाजत दे दी।
3 दिसंबर 2006 को मोनिंदर सिंह पंधेर को सेक्टर-6 स्थित सीओ ऑफिस बुलाया गया। यहां पहले से ही पायल के पिता नंदलाल को भी बुलाया गया था। पंधेर के आने पर उसे एक कमरे में कैद कर लिया गया। जांच टीम ने उससे देसी नार्को टेस्ट के अंदाज में इंजेक्शन की जगह गालियों की डोज दी। पंधेर भी सकपका गया। आखिरकार उसने यह बात स्वीकार की कि पायल उसकी कोठी पर आती थी। पंधेर ने यह खुलासा किया कि पायल एक कॉलगर्ल थी।
यह जानकारी आपको चौंका सकती है। क्योंकि खूनी कोठी की शिकार हुई दीपिका उर्फ पायल खुद एक कॉलगर्ल थी और उसका बाप ही उससे यह धंधा करवाता था। इसके एवज में वह महीने में पंधेर से ‘सैलरीÓ भी लेता था। यही वजह है कि नंदलाल लगातार पुलिस पर दबाव बनाता था कि पंधेर का ही उसकी बेटी को अगवा करने में हाथ है। क्योंकि पायल के गायब होने के बाद से पंधेर कभी भी नंदलाल को फूटी कौड़ी भी नहीं देता था।
यह खुलासा खुद पंधेर ने नोएडा पुलिस के देसी नार्को टेस्ट में कबूल की थी। इसके बाद नंदलाल की बोलती बंद हो गई थी। वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। वहीं, पुलिस के सामने अब पंधेर बोलता ही जा रहा था। उसने यह भी उगल डाला कि ‘हां, मैं अय्याश हूं। कई कॉलगर्ल के संपर्क में हूं। उन्हें अक्सर कोठी पर बुलाता हूं। उनमें से ही एक पायल भी थी। उसे हमने सैलरी के आधार पर ही रख लिया था। इसलिए उसके पिता यह कहकर पुलिस से कंप्लेंट की कि उसकी बेटी नौकरी की तलाश में इंटरव्यू देने सेक्टर-31 डी-5 गई थी। इसके बाद लापता हो गई। भला, कोई बाप ऐसा कैसे हो सकता है कि अपनी बेटी को इंटरव्यू दिलाने के लिए किसी के ऑफिस नहीं बल्कि उसके घर पर भेजता था। एक बार नहीं, बार-बार।

थाना इंचार्ज को मिल गया मौका, धमकी देकर डकार गए 70 हजार रुपये

जब 3 दिसंबर 2006 को पंधेर सीओ ऑफिस आया था तो पूछताछ के लिए तत्कालीन सेक्टर-20 थाना प्रभारी बी.पी. सिंह भी मौजूद थे। पंधेर की कॉलगर्ल से संपर्क की जानकारी पाकर वह फूले नहीं समा रहे थे। निठारी से लापता हो रहे बच्चों के बारे में उससे पूछताछ करने की नहीं सोची। हां, इतना जरूर सोचा कि कैसे अब उससे मुर्गा बनाया जाए। सो वह अकेले में पहुंच गए पंधेर की कोठी। पढ़ा दिया कानून का पुलिसिया पाठ। हथकड़ी लग जाएगी। इज्जत का वाट लग जाएगी। जेल में सड़ जाओगे, अगर इस बयान को लिखा-पढ़ी में आ गई तो। यह सुनकर पंधेर डर गया। समझ भी गया, जो शख्स सीओ ऑफिस में गुमसुम था। वह अब दहाड़ क्यों रहा है। दहाडऩे की कीमत देनी होगी। सो, कमरे के भीतर ले गया। गर्म चाय पीने के लिए पूछा। चाय पिलाने के साथ कितनी महंगी बिस्किट चाहिए। यह भी पूछ डाला। कीमत लगी 70 हजार रुपये कैश। कीमत अदा कर दी गई। यह रकम पंधेर के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। इतने नोट तो वह न जाने कितनी बार बस पल भर की खुशी पाने के लिए उड़ा चुका था। यह तो दुख पहुंचाने से बचने की कीमत थी। रिश्वत देने का खुलासा पंधेर द्वारा सीबीआई को दिए बयान में भी है। इसके बाद पंधेर सेक्टर-20 थाने के कुछ पुलिसकर्मियों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गया। कई पुलिसकर्मियों ने अपने-अपने तरीके से सोने के अंडे पर हाथ साफ किया। लेकिन लापता पायल का क्या हुआ? गायब बच्चों का क्या हुआ? किसी ने भी पता नहीं लगाया। इस तरह न तो गायब बच्चों का राज खुला और न ही पायल का। जांच जस की तस रह गई।

ऐसे खुला पायल के गायब होने का राज़….

पायल के साथ ही उसका मोबाइल फोन भी गायब था। उसकी कॉल डिटेल से कोई सुराग नहीं मिला। इसलिए उस मोबाइल फोन को यूज करने वाले शख्स का पुलिस पता लगाने लगी। सर्विलांस में माहिर सब इंस्पेक्टर विनोद पांडे ही इसका पता लगा रहे थे। बात 21 दिसंबर 2006 की रात लगभग 9:20 बजे की बात है। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से पायल के गायब मोबाइल फोन का आईएमईआई नंबर (नंबर 355352003845870) चलने की जानकारी हुई। इस आईएमईआई नंबर को यूज करने वाले का पता लगाया गया। जानकारी मिली कि बरौला निवासी राजपाल उस मोबाइल फोन यूज कर रहा है। इस पते पर पुलिस की एक टीम पहुंची। उससे मुलाकात हुई। उसने बताया कि मोबाइल फोन में यूज किया हुआ सिमकार्ड मेरे नाम पर खरीदा गया है लेकिन उसका प्रयोग संजीव गुर्जर कर रहा है। पुलिस तत्काल संजीव के पास पहुंची। थोड़ी देर में ही उसके पास से मोबाइल फोन बरामद हो गया। पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ की। यह सोचकर अब पायल का कातिल उनके हत्थे चढ़ गया। लेकिन जब संजीव ने बताया कि उसने एक रिक्शे वाले से फोन खरीदा था तो पुलिस हैरत में पड़ गई। चूंकि रिक्शा वाला उस रास्ते से ही अपने घर जाता था। इसलिए उसके बारे में पुलिस को जानकारी मिल गई। आखिरकार, पुलिस रिक्शा चालक सतलरे के पास पहुंच गई। उसने पूछताछ में बताया कि पिछले महीने एक युवक उसके रिक्शे पर बैठकर सेक्टर-26 से निठारी सेक्टर-31 तक आया था। इस दौरान उसका मोबाइल फोन रिक्शे पर छूट गया। इसलिए उसे मैने अपसे रख लिया और बाद में बेंच दिया। इस तरह मोबाइल रखने वाले को लेकर सस्पेंस एक बार से बरकरार रहा।

27 नवंबर 2006 कॉल डिटेल से खुला खूनी कोठी का राज़

अगर दीपिका उर्फ पायल गायब नहीं हुई होती तो शायद ही लापता हो रहे मासूम बच्चों का रहस्य सुलझ पाता। पायल के मोबाइल फोन में नवंबर में यूज किए हुए सिमकार्ड की जांच की गई। उसमें पता चला कि 1 से 27 नवंबर के बीच पायल के मोबाइल फोन में 9871215328 नंबर का यूज किया गया। इसे सेक्टर-31 निठारी निवासी सुरेंद्र कोली के नाम पर खरीदा गया है। घनी आबादी से घरे निठारी में इस नाम के युवक का पता लगाना आसान नहीं था। हुआ भी यही, पुलिस पता नहीं लगा पाई। तभी कॉल डिटेल में 27 नवंबर 2006 की सुबह 11:07 बजे से लेकर दोपहर 1:13 बजे के बीच 01202453372 नंबर से 11 बार हुई बातचीत पर पुलिस की नजर टिकी। इस नंबर को देख एसआई विनोद पांडे चौंक गए। उन्होंने उस नंबर पर कॉल किया। शायद, पंधेर के ड्राइवर ने फोन रिसीव किया। सब इंस्पेक्टर को पता था कि कोई भी आसानी से कुछ नहीं बताएगा। इसलिए पुलिसिया शैली में पूछा कि, साले सुरेंद्र कोली बहुत शातिर समझता है। और भी गालियां…..। पुलिस वाली। यह सुनकर ड्राइवर सहम गया। उसने कहा कि सुरेंद्र तो गांव अल्मोड़ा गया है। उससे घर का पता पूछा गया। उसने बता दिया सेक्टर-31 डी-5।
इस तरह पुलिस को डी-5 कोठी के खिलाफ पायल को गायब कराने के पीछे पुख्ता सबूत मिल गए। यह बात है 24 दिसंबर 2006 की। पुलिस की एक टीम कुछ घंटे बाद ही कोठी पहुंची। वहां मोनिंदर सिंह पंधेर से मुलाकात हुई। पंधेर से पूछा गया कि कोली कहां है। वहीं, जवाब मिला कि वह गांव गया है। इसके बाद पंधेर को पायल के मोबाइल फोन और उसमें यूज किए हुए सिमकार्ड की जानकारी दी गई। यह जानकर पंधेर भी दंग रह गया। अब पुलिस ने नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार करवाने की जिम्मेदारी पंधेर के कंधों पर डाल दिया। पंधेर भी तैयार हो गया।

पंधेर ने ही पुलिस को पहुंचाया था कोली के घर तक

यह जानकार भी आप आश्चर्य में पड़ेंगे। दरअसल, पंधेर ने ही सुरेंद्र कोली का पूरा पता दिया और अपनी एक लग्जरी गाड़ी भी पुलिस को दी। साथ में ड्राइवर भी। चूंकि वह ड्राइवर कोली के घर जाने वाले रास्तों से वाकिफ था। इसलिए पुलिस की एक टीम पंधेर की गाड़ी से अल्मोड़ा पहुंची। वहां से किसी तरह पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और गाड़ी में बिठाकर नोएडा आने लगे। 25 दिसंबर की शाम सभी लोग नोएडा पहुंचे। इससे पहले रास्ते में ही पुलिस ने सुरेंद्र की अच्छी खासी पुलिसिया खातिरदारी की। लेकिन उसने कुछ भी नहीं बताया। नोएडा में उसे पंधेर के सामने खड़ा किया। फिर भी उसकी जुबां चुप थी।
इसके बाद पुलिस ने उसे थर्ड डिग्री दी। फिर भी चुप। आखिरकार पुलिस टूट गई। लेकिन उसकी चुप्पी नहीं टूटी। उसके रवैये से पुलिस दंग रह गई। 27 दिसंबर भी निकल गया। आखिरकार, मुर्दे से भी उगलवाने वाले दरोगाओं को आजमाया गया। तब सुरेंद्र कोली की जुबां चली। जवाब दिया, हां मैने पायल को मार दिया। क्यों? सवाल पूछा गया। बताया- कि वो अक्सर पंधेर के पास आती थी। उसे मैने कई बार उत्तेजक स्थिति में देखा था। मुझसे भी काफी करीब से बातचीत करती थी। इसलिए पंधेर के नहीं होने पर फोन कर घर पर बुला लिया। वह आ भी गई। उससे सौदा किया। मेरे पास महज पांच सौ रुपये थे। लेकिन वह इतने कम रुपये में नहीं तैयार हुई। कई बार कहा। फिर भी नहीं। आखिर कब तक सुनता। गुस्सा आ गया। बहाना बनाया चाय पिलाने का। उसे कुर्सी पर बिठा दिया। थोड़ी देर बाद कुछ लेेने के बहाने उसके पीछे आया और उसके दुपट्टे से ही गला घोंटने लगा। विरोध किया। लेकिन मेरे खौफ के आगे वह खामोश हो गई। इसके बाद उसके साथ सेक्स किया। वह काफी बड़ी थी इसलिए उसके शव को तीन भाग में कर कोठी के पीछे फेंक दिया। उसके पास रखा मोबाइल फोन अपने पास रख लिया। यह सब पता लगाने में 28 दिसंबर की शाम हो गई।
28 दिसंबर की रात में ही पुलिस कोठी के पिछवाड़े पहुंची। यहां पहले पायल की सैंडिल मिली। पुलिस को यकीन हो गया। उसने जो कहा वह सच है। मांस के लोथड़े भी मिले। इस दौरान तक एक गांव वाले ने देख लिया था। लेकिन रात होने की वजह से उसने भी कुछ नहीं कहा। पुलिस ने भी रात में कोठी के पीछे ज्यादा खोजबीन करना मुनासिब नहीं समझा। यहीं पुलिस से चूक हुई। जिसके खामियाजे के रूप में पुलिस की वर्दी पर हमेशा के लिए ऐसा दाग लगा कि जिसे कभी भी मिटाया नहीं जा सकता। कभी भी नहीं। अगर पुलिस ने यहां तत्परता दिखाई होती और रात में खोजबीन करती तो 29 दिसंबर 2006 को नोएडा पुलिस का यह सबसे बड़ा गुडवर्क होता। मीडिया, पुलिस के खुलासे की सराहना करती। हां, टांग खींचना तो हमलोगों की फितरत है। उससे बाज नहीं आते। लेकिन फिर भी पुलिस जब खुद सब कुछ बताती तो संदेश गुडवर्क का ही जाता। पर पुलिस वालों के लिए काला दिन साबित हुआ।दर्जनों ककंाल मिले तब शक गहराया

दरअसल, 29 दिसंबर की सुबह तक यह नहीं पता था कि निठारी से गायब हो रहे बच्चों के भी तार कोठी नंबर डी-5 से ही जुड़े हैं। लेकिन भनक लगते ही गांव वालों ने ही कोठी के पीछे खुदाई शुरू कर दी। इस दौरान बच्चों के कंकाल भी मिले। कपड़े और चप्पलें भी। इससे पुलिस का शक अब यकीन में बदलने लगा। पुलिस ने तुरंत सुरेंद्र कोली से पूछताछ शुरू की। लेकिन इस बार शुरुआत में ही उसे पुलिसिया डोज दे दिया गया। लिहाजा, उसने चार से पांच बच्चों को मारने की स्वीकार की। लेकिन इस बार पुलिस को विश्वास हो चुका था कि लापता हुए सभी बच्चे नौकर के शिकार हुए हैं। पुलिस ने बच्चों के फोटो दिखाने शुरू किए तो उसने एक-एक कर 17 बच्चों को मारने की बात कबूल कर ली।

पंधेर के शामिल होने से किया था इनकार

नौकर सुरेंद्र कोली ने ही पंधेर को किसी भी बच्चे के अपहरण, रेप और हत्या के मामले में शामिल होने से इनकार किया था। पूछताछ के दौरान उसने यह बात स्वीकार की थी। उसकी सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस ने अलग-अलग पूछताछ की। ताकी वह किसी तरह के प्रेशर में रहे। इसके बावजूद उसने पंधेर को अपना साथी नहीं बताया। हां, इतना जरूर बताया था कि उसकी अय्याशी देखकर ही वह विकृत हुआ। वह पिछले एक साल से पंधेर की अय्याशी देखते-देखते उसकी विकृति बढ़ गई। इसलिए वह पंधेर की गैर मौजूदगी में बच्चियों को बुलाकर उन्हें हवस का शिकार बनाने में जुट गया।

नपुंसक है सुरेंद्र कोली

सुरेंद्र कोली नपुंसक है। मेडिकल परीक्षण में इस बात की पुष्टि हो चुकी है। उसकी शादी भी हुई है। लेकिन इसी वजह से वह अपनी बीवी को घर पर छोड़कर बाहर रहता था। उसने पूछताछ के दौरान यह बात स्वीकार की थी। यह भी बताया कि वह पास के ही एक मेडिकल स्टोर से उत्तेजित करने वाली दवाइयां भी खरीद कर लाता था। दवाइयों का सेवन करने के बाद वह घर के बाहर से गुजर रही लड़कियों को किसी न किसी बहाने घर में बुला लेता था। कभी टॉफी का लालच देता था तो कभी किसी और चीज का। मासूम बच्चों का क्या पता था कि टॉफी के बदले उन्हें मौत मिलेगी। वह भी वीभत्स। चूंकि बच्चों में लड़के और लड़कियों को दूर से देखकर पहचान करना आसान नहीं होता था। ऐसे में जब उत्तेजक दवाई का सेवन किया हुआ शख्स और नहीं पहचान पाता। इसलिए वह कम उम्र के लड़कों को भी लड़की समझकर कोठी में बुला लेता था। जबरन कपड़े निकालने पर जब उसे पता चलता था कि वह लड़का है तब वह आगबबूला हो जाता था। लड़का होने की वजह से वह छोड़ भी नहीं सकता था। क्योंकि उसकी पोल खुल जाती। इसलिए वह लड़कों को भी मार डालता था। इसके बाद शव के टुकड़े-टुकड़े कर रात होने का इंतजार करता था। रात होते ही धड़ को कोठी के पीछे जबकि अन्य हिस्से को सामने के नाले में बहा देता था।

नेक्रोफिलिया जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है कोली

नेक्रोफिलिया, यह ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान शव के साथ सेक्स करता है। दरअसल, उसे इस बात का डर रहता है कि महिला उसका विरोध करेगी। वह उसे संतुष्ट नहीं कर पाएगा। यह बात उसके दिमाग में सालों से रहती है। वह कोशिश भी करता है। लेकिन असफल होता है। ऐसे में वह इस कदर मानसिक रूप से विकृत हो जाता है कि शव के साथ ही सेक्स करता है। ऐसा वह आत्म संतुष्टी के लिए करता है।
नेक्रोफिलिया (necrophilia) ग्रीक शब्द से उभरा है। दरअसल, यह दो शब्दों का मेल है। नेक्रो(In Greek called Nekros) इसका मतलब मरा हुआ (Corpse or dead) और फिलिया (Philia : Friendship) मतलब दोस्त या आकर्षण। यानी शव के प्रति आकर्षण। ऐसी विकृति मिश्र में कई सदियों पहले भी होने के प्रमाण मिले हैं। वहां मरी हुई सुंदर महिला के शव को चार से पांच दिनों तक रखा जाता था। भारत ही नहीं पूरे विश्व में इस तरह की बीमारी से ग्रसित लोगों की संख्या भी बहुत है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीमारी से ग्रस्त होने में 10 से 15 साल लग जाते हैं। अचानक कोई भी इंसान इससे पीडि़त नहीं होता। जब वह सेक्स करने में असफल हो जाता है तो उसे सोच-सोच कर परेशान हो जाता है। सुरेंद्र कोली के मामले में भी ऐसा ही कुछ था। शादी के बाद से वह परेशान रहने लगा। उसकी इच्छा थी, लेकिन असमर्थ था। ऐसे में जब वह अक्सर मोनिंदर सिंह को पंधेर की हरकत को देखता था तब उसकी इच्छा और बढ़ जाती थी। यही वजह है कि वह अपनी हवस को शांत करने के लिए बच्चों को ही बुला लेता था। क्योंकि उसे इस बात का डर रहता था कि ज्यादा उम्र की लड़की उससे सहमत नहीं होगी।

लड़के को देख इतना गुस्साया कि कच्चा मांस खा गया

नौकर सुरेंद्र कोली के मानव मांस खाने की बात बिल्कुल सही है। लेकिन सभी बच्चों और अक्सर मांस खाने की खबर सरासर गलत है। गिरफ्तारी के दूसरे दिन ही पूछताछ के दौरान सुरेंद्र कोली ने यह बताया कि 8 साल के एक बच्चे का उसने मांस खाया था। वह भी कच्चा खा गया था। उसने बताया था कि बच्चे को लड़की को समझ कर मैने कोठी में बुला लिया। उसका मुंह बंद कर जब कपड़े उतारे तो पता चला कि वह लड़का है। इसके बाद वह इस कदर गुस्से में आया कि उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। शव के टुकड़े करने के दौरान ही उसने कच्चा मांस भी खा गया। क्योंकि इससे पहले भी गलतफहमी में वह एक लड़के को लड़की समझ कोठी में लाकर मौत के घाट उतार चुका था।
यहां मैं उस बच्चे का नाम नहीं लिख रहा हूं। इतना जरूर बता दे रहा हूं कि उसके पिता निठारी में दुकान चलाते हैं। कोली की यह बात सुनकर पुलिस भी दंग रह गई थी। पूछताछ कर रहे पुलिसकर्मी खामोश हो गए थे। इस बारे में जब तत्कालीन एसएसपी आर.के.एस. राठौर को जानकारी हुई तो उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को सख्त निर्देश दिए कि यह बात मीडिया में नहीं आनी चाहिए। क्योंकि इससे मामला बिगड़ सकता है। बच्चे के परिजनों पर बुरा असर पड़ेगा।
पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को तो नहीं लेकिन लखनऊ में एक सीनियर अधिकारी को यह जानकारी दे दी। दरअसल, नोएडा पुलिस की यह मजबूरी थी। क्योंकि वह लगातार निठारी पर अपडेट ले रहे थे। लेकिन उन अधिकारी ने इस बारे में एक न्यूज चैनल को जानकारी दे दी। यहां से यह जानकारी उस परिवार तक पहुंच गई।बच्चे की मां दो दिनों तक अचेत पड़ी रही

एक मां का कलेजा कैसे खामोश बैठ सकता है जब उसे पता चले कि उसके लाडले का कलेजा ही कच्चा खा लिया गया। बच्चे की मौत से वह सदमे में तो थी ही। लेकिन जब यह पता चला तो वह दो दिनों तक अचेत रही। इस बारे में भी मीडिया को भी कुछ भी पता नहीं चले। इसलिए इस पर पुलिस अधिकारियों ने पर्दा डाल दिया। बताया जाता है कि अब भी वह महिला कभी-कभार अचानक बेहोश हो जाती है।

In conversation with NEA President Vipin Malhan

Noida Entrepreneurs Association, Sector 6, near Noida Authority Ofice Noida

President Shri Vipin Malhan..9650593902

Noida: The newly-elected Noida Entrepreneurs Association (NEA) President Vipin Malhan has his vision for Noida.

 

What is the role and objective of NEA?
Noida Entrepreneurs Association (NEA) was established as an organization of entrepreneurs. It was set up with an objective to provide assistance and encouragement to entrepreneurs.

 

How has NEA plan to improve the Industrial scene in Noida?
Right now, registered membership is around 1065 whereas total number of entrepreneurs associated with NEA is 6000. All efforts will be made in consultation with all departments to stop the undue harassment of the entrepreneurs. We will also conduct routine inspection.
How has been your charge as the President of the NEA?
Serving NEA for 13 years has been a pleasing experience. Now, I have been chosen as the President of NEA. I will try my best to facilitate competence and to ensure that the industrial growth go up in the city.

 

What will be the focus of the NEA’s Executive Committees?
We wish to focus on the exchange of ideas through meetings, studying the underlying issues and connecting with people. Each individual member is passionate about his contribution in terms of improving, which begin with initiatives and run through a process of exchange of ideas.

 

What are the recent programmes undertaken by NEA?
We would be working on plans stated in our manifesto. The condition of sewerages, drains, roads and street lights is very poor in industrial sectors; hence we will pursue Noida Authority to reintroduce the provision of payment to contractors for sanitation, cleanliness should be made after clearance from sector representatives of NEA.

 

What according to you are the high points in favour of Noida?
Noida is full of potentials. The proximity to NCR is one of the reasons. I think if it is given ample opportunity then it will come up as one of the fast growing city in the country. It is growing with its raw talents. One of the high point of Noida is its specific location and abundant talents.

 

How is the Executive Committee expected to function?
The sub-committees and are expected to function independently in their area of expertise and are advised to report to the EC every month. From the response received in the first two meetings it can be presumed that the members are keenly interested in uplifting the quality of work they have undertaken.

 

Does NEA have any plans to work with the State government to develop entrepreneurship resource potential?

We are just a week old as a new team. With the progress of time, we will definitely extend our reach to the state level. As of now, we have decided to identify and meet professionals, working in different organizations, who are desirous of offering their expertise to the benefit of industry in the city.

 

What is most essential quality of being successful entrepreneur?
Entrepreneurial activities belong to various categories depending on the type of organization and creativity involved. To be an efficient entrepreneur, one should look into the possibilities of creative development inside the organization.

 

What is NEA plan for improving entrepreneurship eco-system in Noida?
We will always try to discuss improving entrepreneurship out by holding meetings and exchanging ideas to meet out the requirements and problems. We are making efforts to impart as many skills as possible. Entrepreneurial activities are substantially different depending on the type of organization and creativity involved

 

Do you have any message for Noidaites and Newzstreet?
I would like to see citizens of the city becoming more aware and achieve the highest possible goal in the life. As for Newzstreet, online news is still in its infant stage but I wish all the luck to Newzstreet team and its endeavors for covering events of the city.

towards creating a much improved entrepreneurial eco-system for Noida.  Apart from pursuing Noida Authority officials to pay attention for addressing plight of the industrial sectors by providing better roads and street lights Mr. Malhan will channelise his energy into creating NEA as a hub for exchange of ideas through meetings, studying the underlying issues and connecting with people. Following are the excerpts of the interview:

What is the role and objective of NEA?

Noida Entrepreneurs Association (NEA) was established as an organization of entrepreneurs. It was set up with an objective to provide assistance and encouragement to entrepreneurs.

How has NEA plan to improve the Industrial scene in Noida?

Right now, registered membership is around 1065 whereas total number of entrepreneurs associated with NEA is 6000. All efforts will be made in consultation with all departments to stop the undue harassment of the entrepreneurs. We will also conduct routine inspection.

What are the recent programmes undertaken by NEA?

We would be working on plans stated in our manifesto. The condition of sewerages, drains, roads and street lights is very poor in industrial sectors; hence we will pursue Noida Authority to reintroduce the provision of payment to contractors for sanitation, cleanliness should be made after clearance from sector representatives of NEA.

What according to you are the high points in favour of Noida?

Noida is full of potentials. The proximity to New Delhi is one of the reasons. I think if it is given ample opportunity then it will come up as one of the fast growing city in the country. It is growing with its raw talents. One of the high point of Noida is its specific location and abundant talents.

What is most essential quality of being successful entrepreneur?

Entrepreneurial activities belong to various categories depending on the type of organization and creativity involved. To be an efficient entrepreneur, one should look into the possibilities of creative development inside the organization.

What is NEA plan for improving entrepreneurship eco-system in Noida?

We will always try to discuss improving entrepreneurship out by holding meetings and exchanging ideas to meet out the requirements and problems. We are making efforts to impart as many skills as possible. Entrepreneurial activities are substantially different depending on the type of organization and creativity involved

Do you have any message for Noidaites and Newzstreet?

I would like to see citizens of the city becoming more aware and achieve the highest possible goal in the life. As for Newzstreet, online news is still in its infant stage but I wish all the luck to Newzstreet team and its endeavors for covering events of the city.

Source: Internet

Noida City Census 2011 data

 

Noida city is governed by Municipal Corporation and is situated in Uttar Pradesh State/UT.

As per provisional reports of Census India, population of Noida in 2011 is 637,272; of which male and female are 349,397 and 287,875 respectively.

Noida City Population 2011

Description
City Noida
Government Census Town
Urban Agglomeration Only City
State Uttar Pradesh
Noida City Total Male Female
City Population 637,272 349,397 287,875
Literates 477,272 276,355 200,917
Children (0-6) 85,699 45,967 39,732
Average Literacy (%) 86.53 % 91.08 % 80.97 %
Sexratio 824
Child Sexratio 864

Noida Religion 2011

Hinduism is majority religion in Noida city with 86.86 % followers. Islam is second most popular religion in city of Noida with approximately 8.55 % following it. In Noida city, Christinity is followed by 0.86 %, Jainism by 0.54 %, Sikhism by 1.11 % and Buddhism by 1.11 %. Around 0.01 % stated ‘Other Religion’, approximately 1.98 % stated ‘No Particular Religion’.

FONRWA Noida

Community Centre, Sector 52, Noida-201301

Shri N P SINGH, PRESIDENT, FONRWA.9811099209/9891227777

 

FONRWA – Executive Committee List 2012-2014

 

 

Shri N P Singh, Federation of Noida RWAs FONRWA….commenting on Indians should make their home in Noida, it’s challenges and messages to then Noidates…also demands for Corporation for Noida….on 20/09/09 at FONRWA office..  

 

Shri N P Singh commenting on …Noida Metro said it is very necessary and fast construction is important.

 

 

 Shri N P Singh commenting on …Noida Park…..said that money could have been better utilised for generation of electricity….

 

Federation of Noida Resident’s Welfare Association (FONRWA) General Secretary Shri Suresh Tiwari commenting on Noida problems, appeal to Noida authority. 

Executive meeting of FONRWA…..on 20/09/09 at 11.00 am to discussthe Noida Problems and steps to be taken up for improvemernts…Magizine …Library fee etc…

Dalit Prerna Sthal – Noida (Construction to Inauguration : A Textual/Image Story)

DALIT PRERNA STHAL OPEN AND CLOSE TIME AT 11AM – 5 PM
DEDICATION OF DALIT PRERNA STHAL ON 2ND OCTOBER 2013
DALIT PRERNA STHAL – PEOPLE SHOWER PRAISE FOR SOCIAL REFORMERS MEMORIAL

 

NOIDA DALIT PRERNA STHAL BEING READIED FOR PUBLIC DEDICATION
DALIT PRERNA STHAL – PEOPLE SHOWER PRAISE FOR SOCIAL REFORMERS MEMORIAL
Video in December 2011

The Rs 650 crore Noida Park has been in the eye of a storm for multiple reasons, including a legal battle, and after consuming the efforts of over 25,000 stone carvers and masons and several hundred statue makers, it has finally emerged as what the authorities refer to as a “modern marvel and a tribute to Dr BR Ambedkar and Mayawati’s mentor and BSP founder Kanshi Ram.”

Designed by architects Design Associates Inc and spread across 33.43 hectares (between the DND lyway and Mahamaya Flyover), the park has been divided into three parts – the Column Plaza, the Central Park Plaza and the Ambedkar Plaza separated by two water fountains. The Column Plaza is dotted with several 300ft high pillars crowned by four-headed elephants and another iron pillar like structure in the centre, complete with a chakra and four elephants. The Ambedkar Plaza houses a total of 12 Dholpur and Mirzapur stone statues, all brought from Lucknow, one of the CM herself and the others of Gautam Buddha, B R Ambedkar and Kanshi Ram. The grander Central Plaza houses the dome that has three more life size statues of the CM, Ambedkar and Kanshi Ram. 2,500 masons were deployed to work exclusively on the central dome meant to commemorate centuries of Dalit oppression.

A total of 24 pink sandstone elephants and innumerable smaller ones also stand guard within the park and all the pillars and the facade of the central dome are ornamented with Buddhist motifs.

Keeping with the Supreme Court’s order of maintaining 75 per cent green cover area in the park, 7,600 trees and 1.5 lakh shrubs have been planted. “We have also made two green lawns covered with flowering plants like Champa, Kachnaar and Jarul near the Central Park Plaza,” said B Prabhakar, director (horticulture), Noida Authority. The park mainly has native trees like Neem, Pilkhan, Peepal, Siras and Jarul. However, in the area where most statues have been installed, the Authority has planted some Bottle Palms, Kanak Champa and other flowering plants.

According to Sant Ram, chief project engineer of the Noida Authority, the park will be open to public on all days, however, a nominal entry fee will be charged from all visitors. A special task force will guard the Park at all times to maintain security.

The construction work on the Park began in January 2009. A total of 6,241 trees were axed and 512 trees had to be shifted to other parks to make way for the Noida Park. Besides receiving much flak from several quarters over the ostentatious statues of the chief minister, patrons of the erstwhile Nandan Kanan park had also approached the Supreme Court that later allowed the project to go ahead on the condition that the constructed area in the park be reduced from the earlier 38 per cent to 25 per cent while the remaining 75 per cent of the total area be maintained as a green belt.

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The Samajik Parivartan Sangrahalay – Dr Babasaheb Ambedkar Memorials Park at Noida near DND flyway, would comprise two ‘stupas’ with galleries which would depict the life history of great personalities and social reformers and their deeds and actions related to social reforms.

The ‘stupa’ being constructed near Noida flyway with a crowd of statues will cost the exchequer Rs 203 crore and there was a budgetary allocation of Rs 294 crore for other parks and statues, the Mayawati government has reportedly told the Supreme Court on 21st August 2009. “The cultural department made provisions of Rs 194.2 crore in the financial year 2008-09 and Rs 100 crore in the year 2009-10.”

Progress of work as on 21/05/2011
Progress of work as on 21/05/2011
Progress of work as on 21/05/2011

Noida Park Decdember 3, 2010: In a reprieve for Uttar Pradesh Chief Minister Mayawati, the Supreme Court on Friday cleared her government’s project to construct, install statues of Dalit icons at a park in Noida, saying it does not come under forest land. “We have found that it is not on forest land,” a Bench of Chief Justice S H Kapadia and Justices Aftab Alam and K S Radhakrishnan said. The Bench, however, added that there are concerns regarding the park’s proximity to the Okhla Bird Sanctuary.

July 23, 2010 Noida Park Hearing in SC: Senior advocate Jayant Bhushan, appearing for some Noida residents, alleged the UP government utilised the forest land for non-forest use by constructing memorials of Dalit leaders on 33 hectares of land for which it had uprooted 6194 trees. Hearing began on Friday July 23, before a special forest bench headed by Chief Justice S H Kapadia.Senior advocates K K Venugopal and S C Mishra, a close aide of Chief Minister Mayawati, submitted that the matter could be brought to an end as the two affidavits submitted by the Centre clinches the issue in the favour of the state government.All work for the Rs 650-crore project on the 33.43 hectare land has been stopped since October 9, 2009, by the apex court order.

Julu 20, 2010: The Centre has sought some time from the Supreme Court to examine environmental impact reports prepared by Uttar Pradesh government in connection with the construction of statues and memorials for Dalit leaders at a park in Noida near here.

A fresh affidavit filed by the Ministry of Environment and Forest (MoEF) said there was a need to examine the three reports prepared by Uttar Pradesh government as they were not concurring with each other.

The matter is listed for hearing on Friday July 23, before a special forest bench headed by Chief Justice S H Kapadia.

All work for the Rs 650-crore project on the 33.43 hectare land has been stopped since October 9, 2009, by the apex court order.

The Centre had earlier opposed the project on environmental grounds.

July 17, 2010 : Chief Justice of India S.H. Kapadia on Friday announced the setting up of an additional Forest Bench in the Supreme Court, to hear environment and mining-related cases.As per the report The CJI has said that the matter relating to installation of statues in the Noida Park would be the first case to be taken up on July 23.

May 24, 2010 Uttar Pradesh Chief Minister Mayawati is set to go ahead with her decision to form a special force to protect her multi-billion dream projects — memorials and statues…More

April 22, 2010: The Supreme Court today directed the Centre to examine the environmental impact caused by the felling of around 6000 trees at a Park in Noida used by Mayawati government for construction of statues and memorials of Dalit leaders. The Bench comprising Justices S H Kapadia and Aftab Alam, said and posted the matter for further hearing in the second week of July..More….

Noida Park to have statues of Dr Ambedkar, Kanshi Ram Mayawati..work halted by Supreme Court
Noida Dr Babasaheb Ambedkar Park Phase-II being developed work halted…on SC’s order.
Photo by G Rajan, attachowk.com ……as on 13/12/2009…
Noida Park Dr Ambedkar , Mayawati, Kanshi Ram staute project halted by Supreme court…
video on December 13, 2009
Noida Stupa being constructed……Photo on 13/12/2009…work halted…on SC’s order.
Noida Stupa being constructed……as on 30/10/2009…work halted…on SC’s order. ….Archive
Noida Stupa being constructed……as on 18/08/2009…. .Archive
Close view of Dr Ambedkar Park Noida …..Archive
Quick view of Dr Ambedkar Park Noida ….Archive

February 5, 2010 : The Supreme Court today fixed March 12 to hear the plea of Uttar Pradesh government for lifting the stay on the work for construction of statues and memorials for Dalit leaders at a park in Noida near here, which was causing a loss of Rs three lakh everyday.

February 3, 2010 : The Uttar Pradesh assembly has passed a bill for raising a special force to provide security to the memorials, parks and statues of Dalit icons including at Gautam Budh Samta Mulak Sthal in Gautam Budh Nagar.

Noida:09/10/09…. SC Blow to Noida’s Maywati’s Staues…..

The fast-track projects of UP Government for building memorials and installing statues of dalit icons including Chief Minister Mayawati today faced another roadblock with the Supreme Court restraining it from carrying out construction activities for its Rs 650 crore venture at a park in Noida adjacent to the capital.

The direction to stop the work for the construction of statues and memorials comprising Mayawati, her mentor Kanshi Ram and other dalit leaders in 35.5 hectare of park land by the apex court came after it last month ordered stoppage of such works in Lucknow and initiated contempt proceedings on October 6 against the Chief Secretary for flagrant violation of its directions.

The Court refused the plea of Mayawati Government that it should adjourn the matter and give time for responding to the Central Empowered Committee (CEC) report which said the project was carried out without environmental clearance.

A Supreme Court-appointed committee inspected the Ambedkar Park being developed in Noida

The team visited the Park around 09.00 am in the morning of 6th August 2009. It is alleged that violations of environmental rules and its effect on the bird sanctuary.

Central Empowered Committee led by Chairman P V Jayakrishnan, a former chief secretary of Delhi Government, inspected the build-up structures and met officers of Noida Authority.

Sources said the committee was apprised of details regarding uprooted trees and build-up structure.

Authority officers informed that it was not forest area and nor it comes under flood zone area. The parks were developed by authority for the residents. Now, five parks were amalgamated into one. Site has only 9,542 square meter built up area though total area is 33.43 hectares.

Officers told the Committee that as built up area was quite less there was no need for getting clearance from the Ministry of Environment.

 

Noida Park Project to beautify the Sector 95 Park is being built at a cost of Rs 187.20 crore.It would have three statues — one each of Bhimrao Ambedkar, Kanshi Ram and Mayawati inside its building. It is expected that after visiting Akshar Dham tourist will visit this park….Video by attachowk.com Noida July 26, 2009

After cutting down 6000 trees for a statue complex in Noida, hundreds of trees are now being planted in the same place — after cracking open freshly-built

 

SC refuses to interfere in Maya’s statue installing spree

Ambedkar Park …wastage of public money?..., thousands of priceless trees have been cut in Noida’s green belt to make way for a sprawling memorial. … .felling trees recklessly?…….now in Supreme Court’ …Political parties now awakened!.. ..

 

Noida Ambedkar Park: Public interest litigation (PIL) filed in the Supreme Court questioning the wastage of public funds by Sukumar and Ravi Kant had sought an urgent hearing so that the inaugural function for the memorials, slated for July 3, could be stopped.

Covered Statue waiting for unveiling…….near by the slip roard that travels towards Toll Bridge…… the area is being beautidied….with park , statue, and dham etc ..

The project to beautify the Sector 95 Park (official ‘address’ of the Yamuna bed in front of Sectors 14A and 15A in the land records) a Central Park Plaza is being built at a cost of Rs 187.20 crore.It would have three statues — one each of Bhimrao Ambedkar, Kanshi Ram and Mayawati inside its building.

Photo by attachowk.com Noida on 26th July 2009

 

Mayawati’s mega project irks Noida

When the Mayawati government started building a wall along four adjacent parks next to the Yamuna riverbed opposite Sectors 14-A and 15-A early last year, residents had thought it was just meant to protect the area...

Special Interview with Prashant Mali, International Cyber Law & Cyber Security expert Lawyer

Brief Profile :
Advocate Prashant Mali is a Internationally renowned Cyber Law & Cyber Security Expert, Author & High Court Lawyer in the country. He has been awarded as “Cyber Security & Cyber Law Lawyer of The Year:2014” by Indian National Bar Association
He is Masters in Computer Science, Masters in Law with certification in Computer Forensics Professional & prior working experience in the field of IT Security & Law for more than 20 Yrs.
He has been interviewed by, BBC World,Doordarshan,Bloomberg,NDTV.Zee Business and Quoted by leading News papers of India & abroad like Times of India, Business Standard,Asian Age to name a few.He regularly writes for leading magazines and is a passionate speaker at National & International Seminars.He has authored 5 books on Cyber Crimes & Cyber Laws. He is a legal adviser to Govt Companies ,MNC’s, Corporates and represents them in various courts.
He has successfully argued and got decisions in landmark cyber cases as a legal counsel.
Recently was invited by Oxford University to Present a paper on “Cyber Terrorism & International Law”
His research interest are in Cyber warfare, Cyber war, Cyber weapon.

Interview :
In tete-a-tete with India’s renowned Cyber Law & Cyber Security expert Lawyer from Mumbai, a Published Author and highly admired speaker, whom I happened to be privileged to listen twice in two different International conferences here in Delhi. I have personally read and referred his book named as “Cyber Crime and Cyber Law Simplified” which is foreworded by Justice Madan Lokur, A Supreme Court Justice, Who is also the Supreme courts Committee chairman and one of the senior sitting judges.
Let me start asking about your origins and early life Advocate Mali
Ans: I was born and brought up in the Mumbai City of Maharashtra State on 29th April 1974, I did my earlier schooling from Sampson English High School in Mulund, and later from St. John School in Thane, for my Higher education later I did my B.Sc. in Physics , M.Sc. in Computer Science & Bachelors in Law(LLB) from Mumbai University & Masters in Law (LLM) from Kakatiya University. I am perusing PhD. In Cyber Warfare & International Cyber Law from Amity University as a Corporate Scholar.
What kind of a student were you ?
Ans: I was an intelligent student but not a studious student, I still believe experience teaches you more than books.
Q.I heard you worked before in IT Industry ? What made you join this field of cyber law & cyber security?
Ans: I worked initially with Creative Computers & Informatics as Faculty for around 3 years, when we had Intel 286 computers and we did not have even Mouse then. Later I joined CMC Limited which was then a Government of India Enterprise as a IT Engineer, this is the place I experimented with various profiles and while leaving I was completely engrossed in IT Security related activities. I also founded the course as founder faculty named DISA (Diploma in Systems Audit) exclusively for Chartered Accountants conducted by Institute of Chartered Accountants. Which now I am associated for around 20 years in course revision, courseware design, teaching whenever I find time till date. When the law The IT Act,2000 was being formulated I was in touch with The Minister of Communications and Information Technology late Mr. Pramod Mahajan, I use to advise him with whatever little knowledge about technology and law I had in a unofficial capacity. This was the time I jumped and made my Firm “Cyber Law Consulting” even though initially I initially use to do only consulting, Information System audits, Network Audits, Information Security, Training and was fortunate to have work of large organisations like Airtel & Honda motors amongst others. My Technical Qualifications coupled with my working in IT industry was the solid motivation, foresight coupled with blessings of almighty made me a winner.
What kind of cases you handle and apart from cases what kind of other work you do for awareness of citizens and students in the field of cyber security and cyber law.
Ans: I am fortunate enough that my law firm Cyber Law Consulting (Advocates & Attorneys) has various clientele and from different industry segments. As a Legal Counsel personally handle cases involving Bails, Anticipatory Bails, Cross Examination and make Arguments for matters related to Electronic Evidence, Data Theft, Hacking, Online Defamation, Online Banking fraud cases, Pornography, Software Piracy, Ecommerce related issues and privacy related matters, in short wherever technology and law is involved I get involved. Apart from litigation my law firm is involved in Consulting, Providing expert opinion, Legal Advice, IT Act,2000 Compliance, Cyber Security Assurance services, registering software Copyrights, filing of trademarks. Handling Cyber frauds and Online Banking fraud cases. I have secured few landmark orders in Adjudication courts for cyber crime in the history of The IT Act,2000.
I believe the more awareness of cyber law & cyber security incidents amongst society the more society becomes resilient towards cyber-attacks. I am associated with many NGO’s and on my personal capacity I conduct free workshops on cyber security and cyber law in education institutes for Students , teachers, Doctors, Chartered Accountants, Lawyers and other professionals. I have donated computers to Thane and Nashik cyber cell of Police. I have given away more than 3500 free books across India to Law and Enforcement agencies and various libraries.
What do suggest to young and budding lawyers who want to take Cyber Law as a profession?
Ans: For becoming a Cyber Lawyer, first and foremost finishing LLB from a Bar Council approved college and university is must. My personal view is if the aspirants have Science or Engineering graduation that helps them understand complexities of technology and law better as they can better correlate them. People not having so can achieve by joining some Networking and Information Security Program and if possible cyber forensics to atleast understand things in perspective. Only knowing technology or only knowing law is recipe for disaster in this field of specialization. The lawyer has to achieve equilibrium in both the fields.
What is the state of policing and judiciary in India as of date?
Ans: I am an optimist and I feel in the country of over 120 crore population to manage cyber crime by Police force recruited and trained to manage law and order is a herculean task and I feel pity and happy that they are doing their job in awful conditions. My personal thinking is Home department of the Government of India should scrap this traditional policing procedures which we are using from British era. A new Police cadre across the country called the cyber police has to be formulated with easy interstate cooperation and centralized records sharing. Judiciary is undergoing through routing trainings and the cases which demand from a particular judge understanding and knowledge of technology, judges have improved either by their own accord or by help of techno savvy judges. Judicial academies are having specific programs to train judges in new challenges of cyber crimes.
Advocate Mali tell me the future of cyber crime and cyber security according to you
Ans: let me address one at a time If you ask me of Cyber Security I feel it is a bottleneck because of times we are in, the illiteracy or les awareness phase, with the advent of internet of things and life dependent technologies, Human race will imbibe cyber security in their culture, it will become way of life as we encounter mosquitos we would manage cyber attacks. Today we do not have any legal framework for cyber warfare but tomorrow we have to have it and abide by it as it would amount to our or human race existence.
Cyber crime menace will grow at the rate of 200 to 300 percent per year for next 4-5 years, but later because of more awareness and controls in place it would be arrested but cyber crime is hear to stay, I predict more lives will be extinguished because of cyber crimes than physical crimes in coming years to come. I feel Government should now have budget, will and plans for mass awareness of citizens to fight against this Satan of cyber crime.